गुरुवार, 18 जुलाई 2013

पुरस्कार से बड़ा सम्मान

राधाकृष्ण मिरियाला ने 2011-2012 में मेरे निर्देशन में एम.फिल. का शोधकार्य संपन्न किया था. विषय : "हिंदी ब्लॉगिंग में महिला ब्लॉगरों का योगदान". ज्यादातर शोधार्थी उपाधि प्राप्त होने के बाद अपने रास्ते चले जाते हैं. लेकिन राधाकृष्ण मिरियाला उसके बाद भी निकटता बनाए हुए हैं. वे दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के प्रचारक प्रशिक्षण महाविद्यालय में प्रवक्ता हैं - इस नाते भी मिलते रहते हैं.

अप्रैल 2013 में जब मुझे आंध्रप्रदेश हिंदी अकादमी ने युवा रचनाकार के रूप में पुरस्कृत किया, तभी से राधाकृष्ण मिरियाला सभा में सम्मान समारोह आयोजित करने की रट लगाए हुए थे. गर्मियों की छुट्टियों के बाद अब महाविद्यालय के खुलते ही उन्होंने आंध्र सभा की अध्यक्ष से अनुमति लेकर कार्यक्रम तय कर लिया. 

बुधवार 17 जुलाई, 2013 को दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में इनके संयोजन में 'शुभकामना समारोह' संपन्न हुआ. अध्यक्षता प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने की. मुख्य अतिथि के रूप में आंध्र सभा की अध्यक्ष श्रीमती एम.सीतालक्ष्मी मंचासीन हुईं. आंध्र सभा के सचिव श्री सी.एस.होसगौडर विशेष अतिथि थे. 

पहले तो खूब आशीर्वचनों और शुभकामनाओं की वर्षा हुई - श्रीमती एम.सीतालक्ष्मी, श्री सी.एस.होसगौडर, डॉ.के.बी.मुल्ला, डॉ.ए.जी.श्रीराम, डॉ.गोरखनाथ तिवारी, प्रमोद बालकृष्ण परीट, शंकर सिंह ठाकुर, वी.अजय कुमार, वेंकटेश्वर राव, संपत देवी मुरारका, मंजु शर्मा और आशीष नैथानी ने प्रशंसापूर्ण वाक्यों की झडी लगा दी. इसके बाद शुरू हुआ शाल, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्नों का सिलसिला. वास्तव में मैं पुरस्कार मिलने पर भी इतनी रोमांचित और गद्गद नहीं हुई थी जितनी इस सम्मान से हुई. मैंने फूल की एक एक पंखुड़ी तक कंजूस के धन की तरह बटोर ली. 

प्रस्तुत हैं इस अविस्मरणीय कार्यक्रम के कुछ चित्र ...



शुभकामना समारोह by Slidely - Slideshow maker

3 टिप्‍पणियां:

DrKavita Vachaknavee ने कहा…

पुनः बधाई और ढेर सारा स्नेह !

आशीष नैथाऩी 'सलिल' ने कहा…

हार्दिक बधाइयाँ :)))
समारोह के कुछ अन्य चित्र --

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SP Sudhesh ने कहा…

पुरस्कार स्वयम् एक सम्मान है , पर उस के बाद सम्मानसभा हो तो सोने में
सुहागा की उक्ति चरितार्थ हो गई । मेरी स्नेहपूर्ण बधाई लें ।