शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

EVIL THOUGHTS

Be awake, be vigilant, because your adversary,
the devil, prowls around as a roaring lion looking for someone to eat and destroy.
1 Pet 5:8 


Fiery darts, a poisoned rain,
Evil thoughts, a searing pain.
They pierce the mind, a sudden strike,
Leaving truth and terror alike.


Whispers rise, a soft hissed sound,
Where shadows creep and fears are bound.
They bend the truth with cunning art,
And steal the calm within the heart.


A burning brand, a hateful gleam,
They shatter hope, and break the dream.
A venomous tide, they start to flow,
Where seeds of malice darkly grow.

Raise up your shield, stand firm and strong,
Let truth and light to you belong.
For fiercest flames and piercing night
Can’t overcome brave hearts alight.

चौदह फरवरी के बाद

गाँव की डाकघर में आज भी वही पुराना बोर्ड टँगा है - “स्पीड पोस्ट उपलब्ध है।”
लेकिन रामदुलारी के लिए समय कभी 'स्पीड' से नहीं चला। वह चौदह फरवरी के बाद जैसे वहीं ठहर गया। उसका बेटा रवि हर साल इसी दिन फोन करता था- “माँ, आज सब वैलेंटाइन डे मना रहे होंगे, आप मेरे लिए खीर बना लेना।”

उस साल फोन नहीं आया। आया तो सिर्फ एक सरकारी वाहन और तिरंगे में लिपटा सन्नाटा।

बरसों बाद भी जब 14 फरवरी आता है, टीवी पर बहस शुरू हो जाती है - कौन ज़िम्मेदार, किसने क्या किया, किसने क्या कहा। गाँव के चौराहे पर भी लोग मोबाइल पर वीडियो दिखाकर गुस्सा दोहराते हैं।

रामदुलारी अब बहस नहीं सुनतीं। वे आँगन में तुलसी के पास दिया जलाती हैं। पास में पड़ोस की नाज़िया खड़ी रहती है - जिसका भाई भी उसी हमले में गया था। दोनों अलग धर्म की हैं, पर उनके आँसू का रंग एक है।

आज नाज़िया का छोटा बेटा रामदुलारी से पूछ बैठा, “दादी, लोग लड़ते क्यों हैं?”

रामदुलारी ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “जब लोग इंसान को भूलकर सिर्फ नाम और पहचान याद रखते हैं, तब लड़ते हैं।”

“तो हम क्या याद रखें?”

उन्होंने आकाश की ओर देखा, जैसे किसी दूर खड़े जवान से बात कर रही हों और कहा- “हम यह याद रखें कि हर शहीद पहले किसी का बेटा था, किसी का भाई था। और अगर हम सच में उन्हें मान देते हैं, तो हमें ऐसा देश बनाना होगा जहाँ किसी माँ को यह सवाल न पूछना पड़े—क्यों?”

वह रामदुलारी की बातें तो आज समझ नहीं पाया लेकिन उसके मन में बेटा और भाई शब्द तो हमेशा-हमेशा के लिए अंकित हो गए।

दूर कहीं लाउडस्पीकर पर देशभक्ति गीत बज रहा था। पर उस छोटे से आँगन में, दो माताएँ बिना शोर के देश को थोड़ा और बड़ा बना रही थीं - नफ़रत से नहीं, सहने की ताकत से।