शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

पुनश्चर्या कार्यक्रम का पहला दिन

  • महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय का नगरागमन 
  • मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय में 
  • पुनश्चर्या पाठ्यक्रम (Refresher Course) 
  • विषय - ''साहित्य, मीडिया और नाटक''.

 आज [05/07/2012] की सुर्खियाँ. 



आज मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद में पुनश्चर्या पाठ्यक्रम (Refresher Course) में प्रतिभागी के रूप में मैंने भी अपना पंजीकरण  कराया. 21 दिनों के कार्यक्रम (5 जुलाई से 25 जुलाई तक) का यह पहला दिन है. एक साथ हिंदी तथा अंग्रेज़ी में यह कार्यक्रम चल रहा है. इसलिए उद्घाटन समारोह में हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों के प्रतिनिधि और प्रतिभागी उपस्थित थे.   इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय और अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद की कुलपति/ उस्मानिया विश्वविद्यालय,हैदराबाद, अंग्रेज़ी विभाग की प्रोफेसर सुनयना सिंह  उपस्थित थे. साथ ही मानू के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.टी.वी.कट्टीमनी और अंग्रेज़ी विभाग के विभागाध्यक्ष भी उपस्थित थे.  



विभूति नारायण राय ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए  कहा कि "भारत में अंग्रेज़ी का ही आधिपत्य रहेगा. ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि दोनों भाषाओं के बीच बहुत अच्छे संबंध नहीं रहे. साहित्य के अध्यापकों को एक ही तरह के खतरे का सामना करना पडता है. हमारे समय में, हमारे समाज में धीरे धीरे साहित्य फालतू चीज़ होता जा रहा है. हिंदी में पठनीयता का संकट सामने आ रहा है." 

पर मैं समझती हूँ कि साहित्य हमेशा ही प्रासंगिक है. वह फालतू चीज़  नहीं है. और न ही हो सकता है. और रही हिंदी में पठनीयता की बात तो मैं समझती हूँ कि  हिंदी भाषा को हम जैसे कुछ अध्यापक मित्र ही बोझिल बना रहे हैं. 

प्रो.सुनयना सिंह ने अपने वक्तव्य में यह कहा कि संस्कृति का अपना महत्व है. साहित्य को परिभाषित करने के विषय में फ़्रांसके (Fronske) को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि "It (Literature) is not a mirror but a hammer. It does not reflect, it shapes." और यह जोड़ा कि This is crux of our subject, our teaching and learning. Unless we see that growth happens inside us as well as outside us we cannot shape ourself. It is a two way process.   

यही है आज का मुख्य समाचार. फिर कल मिलेंगे. समय काफी हो चुका है. लेकिन चलते-चलते इस कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. करन सिंह ऊटवाल का धन्यवाद!....  


3 टिप्‍पणियां:

Prabha Sankar Mishra ने कहा…

right, refreshing review!!!

Prabha Sankar Mishra ने कहा…

right, refreshing review!!!

गुर्रमकोंडा नीरजा ने कहा…

@ प्रभाशंकर मिश्र जी धन्यवाद